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बैतालरानी घाटी

Category Historic

बैताल रानी घाटी -यह घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और हरितिमा के साथ-साथ रोमांच के लिए सबको आकर्षित कर रही है। बैताल रानी घाट में जहाँ प्रकृति का नैसर्गिक सौन्दर्य है, वहीं पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं, जहाँ इतिहास की छोटी, किन्तु महत्वपूर्ण कहानी है, वहीं पुरातत्व की मुँह जुबानी भी है।

बैताल रानी का इतिहास :पुरानी कथाओं के अनुसार सालों पहले यहाँ राजा-रानी का आना-जाना था और इसी जगह पर राजा ने रानी को मारा था. जानकारों के अनुसार बैताल रानी मध्यप्रदेश के लांजी राज की राजकुमारी थी. उनका विवाह धमधा (दुर्ग) के राजा हरिचंद्र से हुआ था. धमधा के राजा अपनी रानी के साथ जंगल में घूमने के लिए जाते थे. कुछ समय बाद बैताल रानी एक चरवाहे से प्रेम करने लगी. चरवाहा भी रानी पर मोहित होने लगा. रानी जंगल घूमने के बहाने चरवाहा से मिलती थी. कुछ समय बाद राजा को यह बात पता चली. इसकी हकीकत जानने के लिए राजा ने गुप्तचर नियुक्त किए थे. तब तक रानी और चरवाहा भागकर जंगल में छिप गए थे. अब राजा रानी की तलाश में बसंतपुर की जंगल की ओर आगे बढ़े, जैसे राजा की नजर रानी पर पड़ी. राजा ने वहीं पर तलवार से रानी के तीन टुकड़े कर दिए. साथ ही चरवाहे को भी मार दिया था.

         bb   Betal Rani Ghati   betal rani

How to Reach

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खैरागढ़ जिले में , छुईखदान से देवरचा-कुम्हरवाड़ा मार्ग पर महज 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.